पितृ पक्ष क्या होता है? जानिए 16 दिन पितरों को क्यों समर्पित होते हैं

पितृ पक्ष क्या होता है
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पितृ पक्ष क्या होता है? पितृ पक्ष हिंदू पंचांग का लगभग 16 दिनों का वह समय है, जब परिवार अपने दिवंगत पूर्वजों यानी पितरों को याद करके श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं। यह भाद्रपद पूर्णिमा से शुरू होकर सर्व पितृ अमावस्या पर समाप्त होता है। इसे श्राद्ध पक्ष और महालय पक्ष भी कहा जाता है।

हर साल बरसात के खत्म होते-होते घर के बड़े पूछने लगते हैं कि “इस बार दादाजी का श्राद्ध किस दिन है?” बहुत से लोग जानना चाहते हैं कि पितृ पक्ष क्या होता है और इसमें क्या करना चाहिए। यहां सब कुछ सरल भाषा में समझिए।

पितृ पक्ष क्या होता है और इसे “पूर्वजों का पखवाड़ा” क्यों कहते हैं?

“पितृ” का अर्थ है पूर्वज और “पक्ष” का अर्थ है पखवाड़ा। यानी पितृ पक्ष का शाब्दिक अर्थ है “पूर्वजों का पखवाड़ा”। इस दौरान किया जाने वाला मुख्य कर्म श्राद्ध कहलाता है, जो “श्रद्धा” शब्द से बना है। जो कर्म श्रद्धा से पितरों के लिए किया जाए, वही श्राद्ध है।

पूर्णिमांत पंचांग में यह समय आश्विन कृष्ण पक्ष कहलाता है, जबकि अमांत पंचांग में इसे भाद्रपद कृष्ण पक्ष कहते हैं। नाम अलग है, पर दिन एक ही हैं।

पितृ पक्ष 2026 कब से शुरू है और किस दिन खत्म होगा?

पितृ पक्ष 2026 की शुरुआत 26 सितंबर (शनिवार) को पूर्णिमा श्राद्ध से मानी जा रही है, जबकि कई पंचांग 27 सितंबर की प्रतिपदा से गिनती करते हैं। इसका समापन 10 अक्टूबर 2026 (शनिवार) को सर्व पितृ अमावस्या पर होगा। तिथि का समय स्थान के अनुसार बदलता है, इसलिए अपने पंडित जी से पुष्टि ज़रूर करें।

पितरों का श्राद्ध इतना ज़रूरी क्यों माना जाता है?

शास्त्रों में तीन ऋण बताए गए हैं: देव ऋण, ऋषि ऋण और पितृ ऋण। पितृ ऋण से मुक्ति का सबसे सरल मार्ग श्राद्ध माना गया है। मान्यता है कि इन दिनों पितर धरती पर अपने वंशजों के पास आते हैं और श्रद्धा से दिया गया जल और अन्न ग्रहण करके आशीर्वाद देते हैं।

एक लोक कथा के अनुसार दानवीर कर्ण को स्वर्ग में भोजन की जगह सोना मिला, क्योंकि उन्होंने कभी पितरों को अन्न अर्पित नहीं किया था। तब उन्हें 15 दिनों के लिए धरती पर लौटकर श्राद्ध करने की अनुमति मिली। यही 15 दिन पितृ पक्ष कहलाए।

श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान एक ही हैं या अलग-अलग?

  • श्राद्ध: पूरी विधि का नाम, जिसमें तर्पण, पिंडदान, ब्राह्मण भोजन और दान शामिल हैं।
  • तर्पण: जल से पितरों को तृप्त करना। जल में काले तिल, जौ और कुश मिलाकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके अर्पित किया जाता है।
  • पिंडदान: चावल या जौ के आटे में तिल, घी और शहद मिलाकर बने पिंड पितरों के नाम से अर्पित करना।

पूर्वज का श्राद्ध किस दिन करें, तारीख से या तिथि से?

श्राद्ध कैलेंडर की तारीख से नहीं, बल्कि उस तिथि से होता है जिस तिथि को पूर्वज का देहांत हुआ था। कुछ विशेष नियम:

  • मातृ नवमी: माता और सुहागिन महिलाओं का श्राद्ध।
  • चतुर्दशी: दुर्घटना या अकाल मृत्यु वाले पितरों का श्राद्ध।
  • सर्व पितृ अमावस्या: जिनकी तिथि याद न हो, उन सभी पितरों का श्राद्ध।

घर पर श्राद्ध कैसे करें? आसान विधि स्टेप बाय स्टेप

श्राद्ध के लिए दोपहर का कुतुप मुहूर्त उत्तम माना जाता है।

  1. स्नान करके साफ वस्त्र पहनें और कुश के आसन पर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठें।
  2. हाथ में जल, तिल और कुश लेकर गोत्र और पितरों के नाम से संकल्प लें।
  3. तांबे के पात्र में जल, काले तिल और जौ मिलाकर तर्पण करें।
  4. पिंड बनाकर पितरों के नाम से अर्पित करें।
  5. भोजन का एक भाग गाय, कुत्ते, कौए, चींटियों और देवताओं के लिए निकालें।
  6. ब्राह्मण को भोजन कराकर दक्षिणा दें, फिर परिवार भोजन करे।

मंत्र और गोत्र उच्चारण में छोटी बातें मायने रखती हैं, इसलिए अनुभवी पंडित जी की बुकिंग करके विधि करवाना सुविधाजनक रहता है।

पितृ पक्ष में क्या करना चाहिए और क्या भूलकर भी नहीं करना चाहिए?

  • करें: रोज़ तर्पण, अन्न और वस्त्र का दान, गाय और कौए को भोजन, सात्विक भोजन।
  • न करें: विवाह, सगाई, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य, नई बड़ी खरीदारी, मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन।

इन दिनों गृह प्रवेश टाल दिया जाता है, इसलिए कई लोग पितृ पक्ष के बाद का शुभ समय ढूंढते हैं। सही दिन तय करने में हमारी गृह प्रवेश मुहूर्त गाइड मदद करेगी, और बाकी अनुष्ठानों की जानकारी सभी पूजाओं की सूची में मिल जाएगी।

क्या आपकी कुंडली में पितृ दोष है? जानिए इसके उपाय

ज्योतिष में पितृ दोष तब माना जाता है जब कुंडली के ग्रह योग पितरों के अधूरे श्राद्ध का संकेत देते हैं। यह पखवाड़ा पितृ दोष शांति के लिए सबसे उपयुक्त समय माना जाता है। इसके लिए त्रिपिंडी श्राद्ध और नारायण बलि जैसे अनुष्ठान किए जाते हैं। कुंडली की जांच के लिए हमारी ज्योतिष परामर्श सेवा लें।

सर्व पितृ अमावस्या को सबसे ख़ास दिन क्यों माना जाता है?

सर्व पितृ अमावस्या पितृ पक्ष का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण दिन है। इस दिन सभी ज्ञात और अज्ञात पितरों का श्राद्ध किया जा सकता है। शाम को दक्षिण दिशा में दीपक जलाकर पितरों को विदा किया जाता है। इसके अगले दिन से शारदीय नवरात्रि शुरू होती है, जिसकी तैयारी के लिए नवरात्रि और दुर्गा पूजा की जानकारी पढ़ें।

श्राद्ध पूजा के लिए अनुभवी पंडित जी कैसे बुक करें?

अगर घर पर विधि को लेकर संशय है, तो BrahmanAcharya ऑनलाइन पंडित पर श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान के लिए सत्यापित पंडित जी चुनें। खर्च पहले ही बता दिया जाता है, ताकि बाद में कोई परेशानी न हो। हमारे पंडितों के अनुभव के बारे में यहां पढ़ें, और कोई सवाल हो तो संपर्क पेज से हमसे जुड़ें।

लोग अक्सर पूछते हैं: पितृ पक्ष से जुड़े सवाल

पितृ पक्ष कितने दिनों का होता है?

यह पखवाड़ा सामान्यतः 15 से 16 दिनों का होता है, जो तिथियों के घटने-बढ़ने से एक दिन कम या ज़्यादा हो सकता है।

पितृ पक्ष में श्राद्ध कौन कर सकता है?

पहला अधिकार बड़े पुत्र का होता है। पुत्र न हो तो पौत्र, भाई, पत्नी या बेटी भी श्राद्ध कर सकती है।

अगर पूर्वज की मृत्यु तिथि याद न हो तो श्राद्ध कब करें?

ऐसे सभी पितरों का श्राद्ध सर्व पितृ अमावस्या के दिन किया जाता है।

पितृ पक्ष में कौए को भोजन क्यों दिया जाता है?

मान्यता है कि कौआ पितरों का प्रतीक है और उसे दिया गया भोजन पितरों तक पहुंचता है।

क्या पितृ पक्ष में नया सामान खरीद सकते हैं?

घर, वाहन या सोने जैसी बड़ी खरीदारी से बचा जाता है। रोज़मर्रा का सामान खरीदने पर कोई रोक नहीं है।

आख़िर में: इस पखवाड़े का असली अर्थ क्या है?

अब आप जान गए हैं कि पितृ पक्ष क्या होता है। यह केवल एक धार्मिक कर्म नहीं, बल्कि पूर्वजों के प्रति आभार व्यक्त करने का अवसर है। विधि छोटी हो या बड़ी, सबसे ज़रूरी है श्रद्धा।

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